Tuesday, March 18, 2008

नियति

रेलवे स्टेशन के पीछे प्लेटफार्म पर ,

बड़े से पुल के नीचे

रहता है एक भिखारी ,

बैठा रहता है आखे मीचे ।

हाथ नही है फटे

लटक रहे तन से चिथड़े ,

हर आने -जाने वाले को

देख रहा बड़ी उम्मीद से ,

रखा कटोरा एक सामने

सिक्को की है आशा उसको

नियति