रेलवे स्टेशन के पीछे प्लेटफार्म पर ,
बड़े से पुल के नीचे
रहता है एक भिखारी ,
बैठा रहता है आखे मीचे ।
हाथ नही है फटे
लटक रहे तन से चिथड़े ,
हर आने -जाने वाले को
देख रहा बड़ी उम्मीद से ,
रखा कटोरा एक सामने
सिक्को की है आशा उसको
Post a Comment
No comments:
Post a Comment